मंजिलों की परवाह नहीं, काफिला बना के जाएंगे,
जिन रास्तों पर कोई ना हो, उन रास्तों पे जाएंगे,
जो तुम्हारा साथ हो, तो बस आगे बढ़ते जाएंगे।
जो साथ ना मिला, तो भी हम आगे बढ़ते जाएंगे,
जो साथ ना मिला, तो भी हम आगे बढ़ते जाएंगे,
जो कारवां अकेला पड़ गया, तो रास्तों से दिल मिलाएंगे,
इन रास्तों की कलीखियों से हम जन्नतें बनाएंगे,
इन कोयलों की पगडंडियों से, तजुर्बे के हीरे पाएंगे।
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